बावरा मन

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आज फिर से ....

Posted On: 25 May, 2011 में

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mother

अरसों बाद आज
प्यारी सी डाँट किसी ने लगायी है
तवे पर सिंकी रोटी मीठी
कई दिनों बाद खायी है

फिर से मीठा दही गुड़ चखा
भगवत चरणों के फूल जेब में रखा
माथे पर आशीर्वाद का टीका
आज फिर किसी ने लगाया है
अपने कोमल हाथों से
मेरे माथे को सहलाया है

थके धूप से विरक्त हुआ
आज मिला फिर शीतल छाँव
कितने दिनों बाद दिख रहा सुन्दर
मेरा प्यारा अपना गाँव

आज उन्मुक्त स्वछंद
लिटा गोद में मन को , बस खोया हूँ
अरसों बाद
हाँ, अरसों बाद आज चैन से सोया हूँ

आज हवाओं में फिर
वही सौंधी खुशबू छायी है
कितनी अच्छी लग रही
मंद-मंद पुरवाई है
आज रात सपने में
मेरी माँ आई है
हाँ, आज रात सपने में
मेरी माँ आई है

http://kumarshivnath.blogspot.com

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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

nishamittal के द्वारा
May 27, 2011

बहुत सुन्दर भावनाएं और उतना ही सुन्दर प्रस्तुतीकरण शिवनाथ जी.

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
May 26, 2011

शिवनाथ जी हार्दिक अभिनन्दन और अभिवादन आप का -माँ के असीम और अतुलनीय प्यार को वर्णित करती ये सुन्दर रचना -काश माँ सपनो में न हो सदा साथ रहे – माथे पर आशीर्वाद का टीका आज फिर किसी ने लगाया है अपने कोमल हाथों से मेरे माथे को सहलाया है शुक्ल भ्रमर ५

priyasingh के द्वारा
May 26, 2011

बहुत ही सुन्दर सब्दो में लिखा है आपने…………….इस मंच पर स्वागत है आपका……..

roshni के द्वारा
May 25, 2011

शिवनाथ जी वह क्या कहे बहुत ही सुंदर कविता ,,, मंद -मंद पुरवाई है आज रात सपने में मेरी माँ आई है हाँ, आज रात सपने में मेरी माँ आई है जिस दिन माँ का सपना आता है वोह सुबह बहुत ही सुहानी होती है .. जागरण पे स्वागत है आभार सहित

    shivnathkumar के द्वारा
    May 26, 2011

    मेरी इस रचना को सराहने के लिए आप सबों का धन्यवाद !!


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