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मौन तोड़ ना सका

Posted On: 5 Jul, 2011 में

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silence
मौन तोड़ ना सका

कुछ बोल ना सका

अंगराई लेती

उथल पुथल मचाती

संवेदनाएँ, भावनाएँ

बनकर आँसू

नयनों से गिर पड़े

मिल धूल धरा में

खोते अपने अस्तित्व को

फिर बोल पड़े

” जिंदा रहूँ तुझमें

मेरी अभिलाषा है

एक दरिया तेरे अंदर

फिर भी क्यूँ प्यासा है

हो सके तो, अगली बार

मौन तोड़ना

बोलना, कुछ जरुर बोलना ”

kumarshivnath.blogspot.com

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

    shivnathkumar के द्वारा
    July 6, 2011

    शुक्रिया तमन्ना जी ,,,,,,,,,!!

surendr shukl bhramar5 के द्वारा
July 5, 2011

शिव नाथ ठाकुर जी सुन्दर भाव सुंदर कोशिश आइये मौन तोडिये लिखते रहिये स्वागत है आप का – एक दरिया तेरे अंदर फिर भी क्यूँ प्यासा है हो सके तो, अगली बार मौन तोड़ना बोलना, कुछ जरुर बोलना ” शुक्ल भ्रमर ५

    shivnathkumar के द्वारा
    July 5, 2011

    शुक्ल जी , टिप्पणी देने के लिए धन्यवाद !!


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