बावरा मन

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आओ पावन होली मनाएँ

Posted On: 4 Mar, 2012 Others में

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चलो चाँद के सुनहले चेहरे पर
थोड़ा सा हरा रंग लगाएँ
रात का रंग श्यामल
लेप आएँ उसपर थोड़ा रंग धवल



हरी पत्तियों से छनकर जो आ रही
सुबह की सुनहरी धूप
भरकर मुठ्ठी में आज उसे
मुन्नी बिटिया के गालों पर लगा आएँ



तोड़ बादल का ईक टुकडा गुलाबी
माँ की चरणों को छू आएँ
बड़े बुजुर्गों के हाथों से
आशीर्वाद का टीका लगवा आएँ



गैया , बछड़े और पंछी
सबको अपने पास बुलाएँ
गाँव किनारे नदी गा रही
चलो थोड़ा वो गीत सुन आएँ
हम वादियों में वहाँ फिर
फगुआ गीत गाएँ
फागुन के रंग में आज हम
सारी नदी रंग आएँ



मिट्टी का रंग गाढ़ा
दिन के माथे पर लगा आएँ
सुंदर वसुंधरा हरी भरी
विकारमुक्त हम हो जाएँ
मिलकर संग आज उसके
आओ पावन होली मनाएँ
मिलकर संग आज उसके
आओ पावन होली मनाएँ


kumarshivnath.blogspot.in



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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ajaydubeydeoria के द्वारा
March 6, 2012

गैया , बछड़े और पंछी सबको अपने पास बुलाएँ गाँव किनारे नदी गा रही चलो थोड़ा वो गीत सुन आएँ हम वादियों में वहाँ फिर फगुआ गीत गाएँ फागुन के रंग में आज हम सारी नदी रंग आएँ जीवन के भागम-भाग में व्यक्ति अपना सब कुछ भूलता जा रहा है. अब तो यह सब सिर्फ किताबों में ही रह जायेगा.इस आधुनिकता ने हमारे अस्तित्व पर ही प्रश्न-चिन्ह लगा दिया है.

    shivnathkumar के द्वारा
    March 6, 2012

    अजय जी , बात तो सही कही आपने. अब जिन्दगी इतनी व्यस्त हो गयी है कि लोगों को बाकी कुछ सोचने का मौका ही नहीं मिलता, या फिर यूँ कहे कि लोग आधुनिकता के गलियारे में भटककर बस कही खो जाते हैं, किसी अनदेखी ख़ुशी की तालाश में . पर सच बोलूँ तो हमें सच्चा शुकून सच्ची ख़ुशी जो दे सकती है वो हमें दिखती ही नहीं या फिर हम देखना ही नहीं चाहते .

yogi sarswat के द्वारा
March 5, 2012

बहुत सुन्दर होली के पावन और मिलनसार त्यौहार की बधाई भेजी है आपने सबको ! प्रकृति के रंगों से सराबोर बहुत खूबसूरत रचना दी है आपने ! बधाई ! http://yogensaraswat.jagranjunction.com

    shivnathkumar के द्वारा
    March 5, 2012

    धन्यवाद योगी जी ………..

dineshaastik के द्वारा
March 5, 2012

प्राकृतिक रंगों से रँगी सुन्दर होली गीत के लिये बधाई साथ ही होली पर्व की हार्दिक शुभकामनायें। कृपया अपनी समालोचात्मक प्रतिक्रिया से अनुग्रहीत करें- http://dineshaastik.jagranjunction.com/?p=60&preview=trueक्या सचमुच ईश्वर है (कुछ सवाल)

    shivnathkumar के द्वारा
    March 5, 2012

    प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद दिनेश जी ……

ANAND PRAVIN के द्वारा
March 4, 2012

शिवनाथ जी,नमस्कार बहोत ही सुन्दरता को समेटे हुए आपकी यह रचना ……………….बिलकुल सीतल और सुन्दर आपकी कविता को पढ़ कर बहुत अच्छा लगा …………बधाई हो

    shivnathkumar के द्वारा
    March 5, 2012

    प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद आनंद जी ……


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