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मुस्कुराती 'बेबसी'

Posted On: 31 May, 2012 Others,मेट्रो लाइफ में

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 (फोटो गूगल से साभार)

(फोटो गूगल से साभार)


चिथरों में लिपटी
दिखती है हर रोज ‘वो’
कि भीगोती है सर्द हवाएँ
हर रात उसे

नयन कोर पर
‘बेबसी’ मुस्कुराती है
चेहरे की मुस्कराहट
बेबसी छुपा जाती है

छिड़ी है ‘जद्दोजहद’
खुद से लड़ने की
समेटे खुद को खुद में
मुक्त आसमां के नीचे
धरा पर बिखरने की

बादल झूमे
सावन के उर में
पर सूखी हर तृष्णा
दिल के अंदर
‘अकाल’ पोषित हो रहा
प्यासा है वो ‘भीत’ समंदर

‘वो’ चीखती, चिल्लाती है
हर रोज कई बार
पर सुनता कौन है
देख लो ‘तमाशा’ यह
यहाँ हर कोई ‘मौन’ है

http://kumarshivnath.blogspot.in/



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7 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Aparajita के द्वारा
December 27, 2012

बहुत ही मार्मिक चित्रण किया है आपने …….. साभार

akraktale के द्वारा
June 3, 2012

वो’ चीखती, चिल्लाती है हर रोज कई बार पर सुनता कौन है देख लो ‘तमाशा’ यह यहाँ हर कोई ‘मौन’ है सुन्दर और मार्मिक रचना.

    shivnathkumar के द्वारा
    June 4, 2012

    टिप्पणी के लिए धन्यवाद अशोक जी …

sonam thakur के द्वारा
June 2, 2012

वेदना से भरे अल्फाजो से बुनी गयी मन को छू जाने वाली रचना के लिए बहुत बहुत बधाई….!!!

    shivnathkumar के द्वारा
    June 4, 2012

    धन्यवाद सोनम जी ….

dineshaastik के द्वारा
June 2, 2012

नयन कोर पर ‘बेबसी’ मुस्कुराती है चेहरे की मुस्कराहट बेबसी छुपा जाती है शिवजी बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति…बधाई….

    shivnathkumar के द्वारा
    June 4, 2012

    धन्यवाद दिनेश जी आपका !!


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